कम लागत में करें अनानास की खेती और पाएं अधिक आमदनी

अनानास की खेती है फायदे का सौदा, जानें ऐसे

अनानास औषधीय गुण वाला फल है। अनानास को दुनिया भर में इसके स्वाद के लिए जाना जाता है। इसकी खेती भी आसान है। आइए विस्तार से जानें...

21 February 2021

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  • यह औषधीय गुणों से भरपूर फल है। इसमें भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें ब्रोमेलेन नाम का एक एंजाइम होता है, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करने का काम करता है। इसके अलावा, अनानास में विटामिन सी, मैंगनीज, थियामिन, राइबोफ्लेविन, पाइरिडोक्सिन, कॉपर जैसे कई माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पोषक तत्व भरपूर  मात्रा में पाया जाता है। 

     

    यदि आप भी परंपरागत खेती से निराश हैं और कम लागत में अधिक आमदनी पाना  चाहते हैं तो आप अनानास की खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं। 

     

    तो आइए, आज हम Knitter के इस ब्लॉग में अनानास की खेती को आसान भाषा में जानें।

     

    इसमें हम आपको बताएंगे- 

     

    • आवश्यक जलवायु
    • उपयोगी मिट्टी
    • खेती की तैयारी कैसे करें
    • अनानास की उन्नत किस्में
    • सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन
    • लगने वाले रोग और उसका इलाज़ 
    • अनानास की खेती से कमाई
    • एक्सपर्ट की सलाह

     

    अनानास की उन्नत किस्में

     

    जलवायु

     

    इसके लिए नम (आर्द्र) जलवायु की आवश्यकता होती है। इसकी खेती के लिए अधिक बारिश की ज़रूरत होती है। भारत में समुद्री तटीय और उत्तर पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र अनानास की खेती के लिए काफी उपयुक्त हैं। 

     

    आपको बता दें, अनानास में ज़्यादा  गर्मी और पाला सहने की क्षमता नहीं होती है। इसकी खेती के लिए 15 से 32 सेंटीग्रेड का तापमान उपयुक्त होता है। इसके लिए 100-150 सेंटीमीटर बारिश की ज़रूरत होती है। 

     

    मिट्टी

     

    अनानास की खेती के लिए अधिक जीवांश वाली बलुई दोमट मिट्टी (Loamy soil) अच्छी होती है। जल भराव वाली भूमि में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए। इसके लिए अम्लीय मिट्टी का पी.एच. मान (PH Value) 5 से 6 के बीच होना चाहिए।

     

    ऐसे करें खेती की तैयारी

     

    अनानास की खेती के लिए शुरुआत में खेत की अच्छे से सफाई करके उसमें मौजूद पुरानी फसलों के अवशेष नष्ट कर दें। मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करके कुछ दिन के लिए खुला छोड़ दें। खेत में गोबर की सड़ी खाद डालकर मिट्टी में मिला दें। खेत में रोटावेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरा बना लें। 

     

    अनानास की उन्नत किस्में

     

    भारत में अनानास की कई किस्मों की खेती की जाती है, लेकिन जायनट क्यू, क्वीन, रैड स्पैनिश, मॉरिशस मुख्य किस्म हैं। 

    क्वीन

    अनानास की यह किस्म बहुत जल्दी से पकने वाली किस्म है। इस किस्म के पौधे बहुत छोटे आकार वाले होते हैं। इसके फलों का रंग पकने के बाद सुनहरी पीला होता है। इसके एक फल का वजन दो किलो तक का होता है। 

    जायनट क्यू

    इस किस्म की खेती पछेती फसल के रूप में की जाती है। यह किस्म रोपाई के 15 से 18 महीने बाद पककर तैयार हो जाता है। इस किस्म के पौधों की पत्तियां लंबी और चिकनी होती है। इसके एक फल का वजन तीन किलो तक का होता है। 

    इस किस्म को हमारे देश में मुख्य रूप से त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, असम, और मिजोरम में उगाया जाता है। 

    रेड  स्पैनिश

    इस किस्म में रोगों का प्रकोप काफी कम होता है। इसके फलों का वजन 1-2 किलो तक होता है। इस किस्म के फलों का बाहरी आवरण कठोर, खुरदरा और पीले लाल रंग का होता है। इस किस्म का उपयोग ताज़े फल के रूप में किया जाता है।

    मॉरिशस

    यह एक विदेशी किस्म है। इसकी पत्तियां दांतेदार होती है। इस किस्म को पकने में 12-15 महीने का टाइम लगता है। इसके फलों का वजन लगभग दो किलो तक होता है।

     

    सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन

     

    बारिश के मौसम में पौधा रोपण करने पर सिंचाई की ज़्यादा ज़रूरत नहीं होती है।  पौधों को पानी धीमे बहाव से या ड्रिप इरिगेशन विधि से देना उचित होता है। पौधों के अंकुरित होने के बाद 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहें। 

     

    जैसा कि हमने आपको बताया, इसके लिए जीवांशयुक्त उपजाऊ दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है। इसके लिए आप खेत की जुताई के समय ही गोबर की सड़ी खाद, वर्मी कंपोस्ट या कोई भी जैविक खाद डालकर उसे मिट्टी में मिला दें। इसके अलावा रासायनिक खाद के रुप में 680 किलो अमोनियम सल्फेट, 340 किलो फास्फोरस और 680 किलो पोटाश साल में दो बार पौधों को ज़रूर दें। 

     

    अनानास की उन्नत किस्में

     

    रोग और उसका इलाज़ 

     

    अनानास के पौधों में बहुत कम रोग लगते हैं। लेकिन, कुछ रोग हैं जो इसके पौधों को  काफी ज़्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। 

     

    जड़ गलन

     

    अनानास के पौधों में जड़ गलन रोग का प्रभाव जल भराव की वजह से होता है। इस रोग की रोकथाम के लिए खेत में जल भराव नहीं होने दें और रोग लगने पर बोर्डों मिश्रण का छिड़काव खेत में करना चाहिए। 

     

    काला धब्बा

     

    इस रोग के लगने पर पौधों की पत्तियों पर काले भूरे रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं। जिनका आकार रोग के बढ़ने पर बढ़ता है, जिससे पौधे का  विकास रुक जाता है। इस रोग की रोकथाम के लिए पौधों पर मैंकोजेब या नीम के तेल की उचित मात्रा का छिड़काव करें। 

     

    लागत और कमाई

     

    एक हेक्टेयर खेत में 16 से 17 हज़ार पौधे लगाए जा सकते हैं, जिससे 3 से 4 टन अनानास का उत्पादन होता है। एक फल लगभग 2 किलो का होता है, जिसका मूल्य बाज़ार में 150-200 रुपये तक आसानी से मिल जाता है। 

     

    इसकी प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज़ में भी काफी अच्छी मांग है। अनानास का उपयोग जूस, डिब्बा बंद स्लाइस आदि के रूप में होता है। यही कारण है कि  अनानास की डिमांड  मार्केट में सालभर रहती है।

     

     

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    ✍️

    लेखक- दीपक गुप्ता 



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