कृषि में मशीनीकरण से हो रहा है बदलाव : जानें, मशीनीकरण के 10

जानें, कृषि मशीनों के 10 लाभ

मशीनीकरण समय और श्रम दोनों बचत करती है। यह कड़ी मज़दूरी और उत्पादन लागत को भी कम करती है। जिससे फ़सलों का उत्पादन और किसानों की आय भी बढ़ती है। आइए जानें कैसे..

22 September 2020

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  • ज़रा सोचिए! यदि आपको खेती, बिना मशीनों के करना पड़े तो आप कैसा महसूस करेंगे? वो भी आज के आधुनिक दौर में, जब खेती के लिए एक से बढ़कर एक आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं।

     

    आप यही कहेंगे ना, जब आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं तो ज्यादा श्रम लगाने की जरूरत क्यों?

     

    तो इसका एक आसान का जवाब है- 'कृषि का मशीनीकरण'

     

    मशीनीकरण से खेती इतना आसान हो गया है कि खेती के व्यवसाय में युवा भी आकर्षित हो रहे हैं। 

     

    कृषि में मशीनीकरण से अनेक लाभ है आइए इस ब्लॉग में जानते हैं कि कृषि में मशीनीकरण से किसानों को क्या-क्या लाभ हो रहे हैं। 

     

    कृषि में मशीनीकरण के 10 लाभ

     

    (1) उत्पादन में वृद्धि (Increase in production)

     

    आज़ादी से पहले तक हमारे देश में कृषि मशीनीकरण का अभाव था। खेती परम्परागत और मानव श्रम पर निर्भर थी। जिसकी वजह से कृषि उत्पादन भी कम था। लेकिन आज तेजी से हो रहे मशीनीकरण के चलते उत्पादन में बढ़ोतरी हो रही है। 

     

    मशीनों के उपयोग से उत्पादन लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है और लागत में भी 20 प्रतिशत तक की कमी आती है।  

     

    आज हमारा देश खाद्यान के मामले में आत्मनिर्भर बन गया है। 1950-51 में खाद्यान्नों का कुल उत्पादन 51 मिलियन टन था जो कि 2015-16 में बढ़कर 252 मिलियन टन हो गया।

     

    (2)  प्रति व्यक्ति उत्पादन में वृद्धि (Increase in per capita production)

     

    जैसा कि हम सभी जानते हैं, हल-बैल से खेत जोतने में बहुत समय लगता है। जबकि वही काम ट्रैक्टर से होता है, बहुत ही कम समय लगता है। मशीनों के उपयोग से श्रमिकों की कार्य कुशलता और क्षमता में बढ़ोत्तरी हो जाती है, जिससे प्रति व्यक्ति उत्पादन भी बढ़ जाता है। 

     

    (3) उत्पादन लागत में कमी (Production cost reduction)

     

    खेती में मशीनों का उपयोग होने से कृषि लागत कम होती है। जैसे-

    कोई किसान हल-बैल से खेती करता है तो अतिरिक्त लागत की ज़रूरत होती है। क्योंकि उन्हें जानवरों के चारा पर खर्च करना पड़ता है, चाहे वे काम कर रहे हों या नहीं।

    जबकि ट्रैक्टरों का उपयोग करना किसानों को लाभकारी होता है। क्योंकि मशीनों का उपयोग नहीं करने पर उन्हें ईंधन की जरूरत नहीं होती है। 

     

    राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद के एक आँकड़े के अनुसार ट्रैक्टर से खेती करने की प्रति एकड़ लागत 100 रुपए है। जबकि यही काम जानवरों की सहायता से हो, तो लागत 160 रुपए आती है। 

     

    (4) आय में वृद्धि (Income growth)

     

    मशीनीकरण से उत्पादन और उत्पादकता के साथ किसानों की आय में भी बढ़ोत्तरी होती है। कृषि मशीनों की सहायता से किसान कम समय और कम लागत में अधिक कृषि उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं, इसके फलस्वरूप किसानों की आय में वृद्धि होती हैं।

     

    कृषि उपकरणों की सहायता से किसानों की आय 30-50 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है।

     

    (5) कम भूमि में ज्यादा उत्पादन (More production in less land)

     

    कृषि तकनीक आज किसानों की भूमि की समस्या से भी निजात दिला रही है। किसान कम भूमि में ज्यादा उत्पादन करने में सक्षम हैं। आज बहुत से कृषि कार्य ऐसे हैं जिसमें भूमि की जरूरत ही नहीं पड़ती है। जैसे मशरूम की खेती, लाख की खेती इत्यादि।

     

    (6) समय की बचत (Time saving)

     

    कृषि मशीनीकरण से किसानों को समय की काफी बचत होती है। जो काम एक जोड़ी हल और बैल से पूरे दिनभर किया जाता है उसे एक ट्रैक्टर एक घण्टे में कर देती है। समय के बचत होने से किसानों अपने दूसरे कामों पर ध्यान देने का मौका मिलता है। 

     

    (7) जीवनस्तर में सुधार (Improve rural life)

     

    मशीनीकरण किसानों को अधिक श्रम, थकाऊ, कड़ी मेहनत से मुक्त करता है। भूमि पर दबाव कम हो जाता है और किसानों की स्थिति में सुधार होता है।

     

    कृषि मशीनीकरण से कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में भी बदलाव आ रहा है। किसानों को अन्य रोजगार जैसे- आटे चक्की की मशीन, तेल पेराई की मशीन से अवसर प्राप्त हो रहा है। 

     

    (8) वाणिज्यिक कृषि को मिलता प्रोत्साहन (Commercial agriculture gets encouragement)

     

    कृषि मशीनों के प्रयोग से व्यापारिक कृषि को प्रोत्साहन मिलता है। उद्योगों को कच्चा माल पर्याप्त मात्रा में कृषि क्षेत्र द्वारा उपलब्ध कराया जा सकता है। व्यापारिक खेती, निर्वाह खेती, बागानी खेती मशीनीकरण का ही परिणाम है।

     

    कृषि मशीनकरण से ही उद्योगों को कच्चा माल पर्याप्त मात्रा में कृषि क्षेत्र द्वारा उपलब्ध कराया जा सकता है, क्योंकि वाणिज्यिक खेती की उपज की बिक्री न केवल अपने देश में बल्कि विदेशी बाजारों तक भी होती है।

     

    (9) श्रम की समस्या का हल है मशीनीकरण (The problem of labor is mechanization)

     

    कृषि जगत के सामने श्रमिकों की कमी एक विकट समस्या बनती जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक खेती में श्रमिकों की किल्लत 25 से 30 प्रतिशत तक है। 

     

    जिन देशों में मानव श्रम की भारी कमी है, वहाँ श्रम की जरूरतें मशीनों से ही पूरी होती है। आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड इत्यादि देशों में मानव श्रम की भारी कमी होने के बावजूद वहाँ कृषि उत्पादन अधिक है।

     

    (10)  भूमि का बेहतर उपयोग (Better use of land)

     

    पहले किसान अधिक श्रम और लागत कारण अपने भूमि को परती ही छोड़ दिया करते थे, लेकिन मशीनों के उपयोग से परती भूमि पर खेती करने में सक्षम हैं। गहरी जुताई से बंजर भूमि को फिर से उपजाऊ कर खेती योग्य बनाने में मशीनों का बहुत बड़ा योगदान है। 

     

    संक्षेप में कहें तो कृषि मशीनरी से अनेक लाभ हैं। आधुनिक मशीनें खेती को आसान बनाती है। कृषि मशीनरी के उपयोग से ही किसान की जिंदगी बेहतर और ख़ुशहाल हो सकती है। 



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