जैविक कृषि की तकनीकों (organic farming techniques)पर एक नज़र

जैविक कृषि की तकनीकों (organic farming techniques)पर एक नज़र

जैविक कृषि की तकनीक (organic farming techniques) किसानों के जीवन व कृषि क्षेत्र में सुधार की दृष्टि से अहम है। इस ब्लॉग में आज हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे।

22 October 2020

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  • दशकों पहले खाद्यान्न संकट से उबरने के लिए किसानों के सामने कई बड़े लक्ष्य रखे गए। उन्हें हासिल करने के लिए कृषि तकनीकों में बदलाव किए गए और फसल दर फसल केमिकल फर्टिलाइज़र और पेस्टिसाइड्स का उपयोग किया गया। उस तकनीक से लक्ष्य तो हासिल हुए, मगर लंबे समय में कृषि क्षेत्र के लिए कई मुश्किलें खड़ी हो गईं। आज स्थिति यह है कि कृषि क्षेत्र को उत्पादकता और पर्यावरण से जुड़ी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका ख़ामियाज़ा हमारे किसान भाई उठा रहे हैं।

     

    लेकिन देर नहीं हुई है। हमारे पास ‘जैविक कृषि’ के रूप में उम्मीद की एक किरण अब भी बाकी है, जो फिर से कृषि क्षेत्र को नई दिशा दे सकती है। बस आवश्यकता है, तो जैविक कृषि (organic farming) की सही तकनीकों को अपनाने की। तो चलिए, जानने की कोशिश करते हैं कि कैसे जैविक कृषि (organic farming) की सही तकनीकों का सहारा लेकर किसान भाई अपनी मुश्किलों को दूर कर सकते हैं।

     

    जैविक कृषि की तकनीक (Techniques of Organic Farming):

     

    जैविक कृषि तकनीक (organic farming techniques) से एक परिचय

    फसल चक्र (Crop Rotation):

    किसानों को यह समझने की आवश्यकता है कि लगातार एक सी फसल लेना उनके लिए कितना घातक हो सकता है। यदि किसान एक तरह की फसल लगातार लेते हैं, तो मिट्टी की उपजाऊ क्षमता पर इसके ढेरों नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। उर्वरता कम होती है, सूक्ष्म जीवों की संख्या में कमी आती है और खरपतवार आदि की समस्या भी बढ़ने लगती है। यहां तक कि मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी के अलावा जल धारण करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में फसल चक्र की तकनीक किसानों के काम आती है।

     

    आपको बता दें कि फसल चक्र कोई रॉकेट साइंस नहीं है। महज़ सही फसल लेने की एक तकनीक है। यदि आप धान की फसल ले रहे हैं, तो उसके बाद दलहन की ले लें। यदि आपकी किसी फसल में खाद और पानी की आवश्यकता अधिक होती है, तो अगली बार ऐसी कोई फसल लें, जिसमें खाद व पानी कम लगे। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि स्थानीय जलवायु के लिहाज़ से कौन सी फसल सही रहेगी। है ना आसान? अगर आपने फसल चक्र की इन छोटी-छोटी बातों को समझ लिया, तो विश्वास मानिए आपके खेतों की मिट्टी आपके माथे का चंदन बन जाएगी।

     

    जैविक कीट प्रबंधन (Organic Pest Management):

    कीट और खरपतवार किसानों के सबसे बड़े दुश्मन हैं। इन्हीं को नियंत्रित करने करने के लिए जैविक कीट प्रबंधन की तकनीक अपनाई जाती है। यहां ‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त’ वाली रणनीति पर बल दिया जाता है। सबसे पहले कीटों के प्राकृतिक दुश्मनों की पहचान की जाती है और उन्हें खेतों में छोड़ा जाता है। इन्हें बायो एजेंट भी कहा जाता है। इनकी खास बात यह होती है कि ये सीधे अपने दुश्मन यानी कीटों पर प्रहार करते हैं, किसानों की फसलों पर नहीं। इस तरह किसान जैविक तरीके से कीटों को नियंत्रित कर पाते हैं।

     

    हरी खाद (Green Manure):

    किसानों और फसलों का यदि कोई सच्चा मित्र है, तो वो है ‘हरी खाद’। फसलों के लिए हरी खाद का उपयोग प्राचीन समय से किया जा रहा है। लेकिन जब से रासायनिक खेती (केमिकल फार्मिंग) पर ज़ोर दिया गया, ज़्यादातर किसान अपने इस मित्र को भूल गए। यहां बताना ज़रूरी है कि हरी खाद एक तरह की सहायक फसल होती है जिसका इस्तेमाल भूमि में पोषक तत्वों की वृद्धि के लिए किया जाता है। इसे उन्हीं खेतों में ही उगाया जाता है, जिस पर किसानों को फसल लेनी होती है। एक बार जब हरी खाद की फसल तैयार हो जाती है, तो मिट्टी को पलट दिया जाता है। मिट्टी में मौजूद नमी से वह फसल सड़ जाती है और मिट्टी में पोषक तत्वों का समावेश होता है। बस इतना ही तो करना है आपको! अब अगली बार फसल लें तो हरी खाद पर ज़रूर गौर करें।

     

    कंपोस्ट (Compost):

    यह एक तरह की जैविक खाद है, जिसे फसल अवशेषों और पशुओं के गोबर आदि के ज़रिए तैयार किया जाता है। इसमें कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो फसलों के विकास के लिए ज़रूरी हैं। कंपोस्ट को एक संतुलित वातावरण में तैयार किया जाता है जहां हवा, पानी और धूप संतुलन में हों। इसे बनाने की प्रक्रिया में सूक्ष्म जीवों का विशेष योगदान होता है। किसान अलग-अलग तरीकों से इसे बना सकते हैं। कई किसान ‘गड्ढा विधि’ के ज़रिए कंपोस्ट तैयार करते हैं तो कई ‘ढेर विधि’ के ज़रिए। लीजिए, बातों-बातों में आपने जैविक कृषि की एक और तकनीक जान ली। 

     

    यांत्रिकी खरपतवार नियंत्रण (Mechanical weed Control)

    खरपतवारों की रोकथाम के लिए किसान इस विधि का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। जैविक कृषि की यह तकनीक तब कारगर होती है, जब किसी विशेष परिस्थिति में दूसरी विधियां उपयोग में ना लाई जा सकें या फिर वह उस दौरान उतनी कारगर न हों। इस तकनीक से खरपतवारों को सीधे तौर पर खत्म किया जाता है। साथ ही उनके लिए प्रतिकूल स्थितियां भी निर्मित की जाती हैं जिससे वे नष्ट हो जाते हैं। इस तकनीक में मुख्य रूप से खुरपी, हंसिया, फावड़ा जैसे हाथ से चलाने वाले औज़ारों के अतिरिक्त पशु-चालित यंत्रों तथा ट्रैक्टर आदि का भी उपयोग किया जाता है। 

     

    तो फिर सोच क्या रहे हैं? आगे बढ़िए और जैविक कृषि से नाता जोड़िए। एक बार आपने जैविक कृषि को अपना लिया तो अच्छी फसल और खुशियां, दोनों ही आपके जीवन में दस्तक देंगी। 

     

    उम्मीद है कि आपको हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा। यदि आप जैविक कृषि पर और अधिक जानकारी चाहते हैं तो हमारे ब्लॉग “ जानें, जैविक कृषि (organic farming) क्यों है ज़रूरी?” को अवश्य पढ़ें।

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