मिट्टी की जांच (soil testing) के लिए अपनाएं ये तरीका

मिट्टी की जांच (soil testing) के लिए अपनाएं ये तरीका

स्वस्थ मिट्टी व उसमें मौजूद पोषक तत्व ही अच्छी फसल का निर्धारण करते हैं। इसलिए कृषि उत्पादकता की दृष्टि से मिट्टी की जांच (soil testing) बेहद अहम है।

03 October 2020

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  • ‘मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे-मोती...’ मनोज कुमार की फिल्म उपकार का यह गाना आज भी भारतीय कृषि पर उतना ही प्रासंगिक नज़र आता है, जितना कि दशकों पहले नज़र आता था। इस गाने में सीधे तौर पर हमारे देश की मिट्टी की बात की गई है। उस मिट्टी की बात जो भारतीय कृषि का आधार है, जो हमारे अन्नदाताओं की जीवन रेखा है और हम और आप जैसे करोड़ों भारतीयों के अस्तित्व का स्तम्भ। आज हम इस ब्लॉग के ज़रिए इसी जीवनदायी मिट्टी के स्वास्थ्य (soil health) तथा उसकी जांच की प्रक्रिया पर प्रकाश डालेंगे। लेकिन संक्षेप में यह भी जानेंगे कि मिट्टी का स्वास्थ्य होता क्या है और इसकी जानकारी क्यों ज़रूरी है?

    क्या होता है मिट्टी का स्वास्थ्य (Soil Health) :

    मिट्टी के स्वास्थ्य को आप उसके गुणों के आधार पर समझ सकते हैं। मिट्टी में कई प्रकार के पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो फसल के उगने से लेकर उसके बढ़ने तक के सारे चरणों का निर्धारण करते हैं। सामान्य शब्दों में कहें, तो मिट्टी की उपजाऊ क्षमता ही उसके स्वास्थ्य का परिचायक है।

    क्यों ज़रूरी है मिट्टी के स्वास्थ्य (Soil Health) को जानना:

    मिट्टी के स्वास्थ्य को जानना इसलिए ज़रूरी है ताकि हमारे किसान भाई यह जान सकें कि उनके खेतों की मिट्टी में कौन से पोषक तत्वों की कमी या अधिकता है। इससे उन्हें फसलों के चयन में भी मदद मिलेगी।

     

     

     

    मिट्टी की जांच (soil testing) के लिए कैसे लेनी है खेतों से मिट्टी:

    ·   सबसे पहले भूमि से घास इत्यादि को साफ कर लें।

    ·   8-10 अलग-अलग स्थानों में ‘V’ आकार के करीब 6 इंच गहरे गड्ढे तैयार करें और उनमें से मिट्टी के सैंपल लें।

    ·  अब उस मिट्टी से करीब आधा किलो (1/2 kg) का एक मिक्स सैंपल तैयार करें, ताकि जांच में यह पता लगाना आसान हो कि आपके समूचे खेत की मिट्टी कैसी है?

    ·   यदि उसमें कंकड़ या घास इत्यादि हों, तो उसे साफ कर लें।

    ·   उसे कुछ समय तक छांव में सूखने के लिए रख दें।

    ·   अब उसे साफ कपड़े या कपड़े की किसी थैली में भरें।

     

    किसान कैसे भेज सकेंगे मिट्टी के सैंपल प्रयोगशालाओं (soil testing labs) में:

    ·   मिट्टी के सैंपल (soil sample) के साथ किसान को अपना नाम, पिता का नाम, खसरा नंबर,

        मोबाइल नंबर तथा भूमि व सिंचाई से जुड़ी अन्य जानकारियां प्रदान करनी होंगी।

    ·   उसे जानकारियों से जुड़े दो लेबल तैयार करने होंगे।

    ·   एक लेबल को थैली के अंदर तथा दूसरे को थैली के बाहर लगाना होगा।

    ·   ध्यान रहें, लेबल पर कभी भी स्याही से न लिखें। सिर्फ सामान्य बॉल पेन का उपयोग ही करें।

    ·   इसके बाद सैंपल को जांच के लिए प्रयोगशाला में भेज दें।


     

    सावधानियां (precautions) जो बनाएंगी इस प्रक्रिया को आसान:

    ·   पहली फसल कटने के बाद और दूसरी फसल बोने के पहले ही सैंपल लें।

    ·   ऐसी जगह से मिट्टी का सैंपल (soil sample) न लें, जहां गड्ढा हो

    ·   खेत की मेड़ या सड़क के पास से सैंपल न लें।

    ·   लेबल व जानकारी संबंधी पर्ची में संपूर्ण जानकारी भरें।

    ·   सैंपल लेने के 3 दिन के भीतर ही उसे जांच के लिए भेज दें।

    ·   ध्यान रहें, मिट्टी के गीले सैंपल कभी न भेजें।

    ·   मिट्टी में बहुत जल्द बदलाव नहीं होते हैं, इसलिए बेहतर होगा कि जांच (soil test) हर तीन साल बाद ही की जाए।

     

    हमें उम्मीद है कि आपको हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा। हमारे अगले ब्लॉग में हम मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा करेंगे, जिससे आपको इस विषय पर और अधिक जानकारी मिल पाएगी। 

      

     

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