Cottage industry: महिलाओं की कुटीर उद्योग में बढ़ती भागीदारी

Cottage industry: महिलाओं की कुटीर उद्योग में बढ़ती भागीदारी

कुटीर उद्योगों (Cottage industry) के ज़रिए अब महिलाएं आगे आकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। जिससे महिलाओं की स्थिति में सुधार आ रहा है।

17 October 2020

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  • अक्सर हम महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) की बात करते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि महिलाएं हमेशा से ही सशक्त रहीं हैं। उनकी दक्षता और काबिलियत पर मुहर लगाने की बात बिल्कुल “सूरज को दीपक दिखाने” जैसी है। आप जिस किसी भी क्षेत्र में नज़र उठाकर देखे लीजिए, आपको महिलाओं की भागीदारी नज़र आएगी। कुटीर उद्योग (Cottage Industries) भी उन्हीं में से एक है, जिसकी नींव महिलाओं ने रखी है। उन्होंने खुद को रसोई घर तक सीमित न रखते हुए कुटीर उद्योगों के ज़रिए अपनी अलग पहचान बनाई है और इस क्षेत्र को नई दिशा दी है। चलिए, इस ब्लॉग के ज़रिए कुटीर उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी पर प्रकाश डालते हैं और ये जानने का प्रयास करते हैं कि इससे क्या-क्या बदलाव हुए हैं।

     

     

     

    महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है

     

    कुटीर उद्योगों ने हर वर्ग की महिलाओं को आगे आने के लिए प्रेरित किया है। न सिर्फ शिक्षित, बल्कि कम पढ़ी-लिखी व अशिक्षित महिलाएं भी इसका हिस्सा हैं। वे अपने घरों में रहते हुए काम कर रहीं हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। कुछ समय पहले आई एक रिपोर्ट के मुताबिक शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इस बात से यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि देश के कोने-कोने में महिलाएं इस क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम कर रहीं हैं। 

     

    उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल रहा है 

     

    कला के प्रदर्शन की दृष्टि से कुटीर उद्योग (Cottage Industry) बहुत अहम हैं। आप जिस काम में अच्छे हैं, उसे ही अपनी आमदनी का ज़रिया बना सकते हैं। फिर चाहे वह नक्काशी हो, सिलाई-बुनाई का काम हो या फिर अचार-पापड़ और खिलौने बनाने का काम। कुटीर उद्योगों की अच्छी बात ये है कि महिलाएं घर पर रहकर ही ये सारे काम कर सकतीं हैं। साथ ही अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन भी कर सकतीं हैं। इसके लिए उन्हें किसी फैक्ट्री या कारखाने आदि में जाने की ज़रूरत नहीं है। लिहाज़ा, ये बात कही जा सकती है कि कुटीर उद्योगों ने महिलाओं को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का सुनहरा मौका दिया है।

     

    सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव हो रहे हैं

     

    भारतीय समाज (Indian Society) में सदियों से पुरुषों व महिलाओं में भेदभाव किया गया है। लड़कियों को बचपन से ही यह सीख दे दी जाती थी कि उन्हें बड़े होकर रसोई घर (Kitchen) संभालना है और अपने परिवार का ख़याल रखना है। लेकिन अब हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं और जिस तरह हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, उसने रूढ़िवादी सोच को तोड़ा है और सामाजिक बदलाव (Social Change) की नींव रखी है। कुटीर उद्योगों (Cottage Industry) का भी इसमें अहम योगदान रहा है क्योंकि इससे महिलाओं को आगे आने की राह मिली है।

     

    हम आशा करते हैं कि कुटीर उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी पर हमारा यह ब्लॉग आपको पसंद आया होगा। यदि आप ग्रामीण विकास से संबंधित अन्य विषयों पर जानकारी चाहते हैं तो आपको हमारे अन्य ब्लॉग को ज़रूर पढ़ने चाहिए। आप ग्रामीण विकास के अलावा कृषि एवं मशीनीकरण, बिज़नेस, एजुकेशन और करियर, सरकारी योजनाओं जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।    

     

     

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    लेखक- भावना चौहान

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