ऐसे शुरू करें मोतियों की खेती (Pearl Farming)

ऐसे शुरू करें मोतियों की खेती (Pearl Farming)

मोतियों की खेती (pearl farming) एक निश्चित प्रक्रिया के तहत की जाती है। इसलिए इसके बारे में जानना बहुत आवश्यक है। आइए, जानते हैं कैसे होती है मोतियों की खेती।

03 November 2020

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  • प्राचीन समय से ही मोतियों का अपना महत्व रहा है। इनका उपयोग न सिर्फ़ आभूषणों में किया जाता है, बल्कि दवाइयां आदि बनाने में भी इनका इस्तेमाल होता है। भारत में मोतियों की मांग लगातार बढ़ रही है। शायद यही वजह है कि किसानों के साथ-साथ सरकारें भी मोतियों की खेती पर ज़ोर दे रहीं हैं। यहां आपको यह बताना भी ज़रूरी है कि मोतियों का उत्पादन चरणबद्ध तरीके से किया जाता है। इस ब्लॉग में हम इसी पर चर्चा करेंगे। लेकिन इससे पहले संक्षेप में यह जान लेते हैं कि मोती कितने प्रकार के होते हैं।

     

    मोतियों के प्रकार (Types of Pearls):

    मोतियों के प्रकार

    कृत्रिम मोती (Artificial  Pearls):

    कृत्रिम मोती (Artificial Pearls) दिखने में बिल्कुल प्राकृतिक मोती की तरह ही होते हैं। इनकी कीमत काफी कम होती है और ये बाज़ार में बड़ी आसानी से मिल जाते हैं। इन्हें बनाने के लिए जिलेटिन का उपयोग किया जाता है।  

     

    प्राकृतिक मोती (Natural pearls):

    ये मोती प्राकृतिक तरीके से अस्तित्व में आते हैं। इसमें इन्सानों की कोई भूमिका नहीं होती है। ये समुद्र में पाये जाते हैं। जब कोई कण या मृत कोशिकाएं सीप में प्राकृतिक रूप से प्रवेश कर जाते हैं, तो धीरे-धीरे वो मोती में तब्दील हो जाते हैं। इन मोतियों की कीमत लाखों में होती है। ये बहुत मुश्किल से पाये जाते हैं।

     

    संवर्धित मोती ( Cultured pearls):

    संवर्धित मोती बनाने की विधि खेती का ही एक अंग है। इसके ज़रिए बड़ी संख्या में मोतियों का उत्पादन किया जाता है। संवर्धित मोती (cultured pearls) बनाने की प्रक्रिया प्राकृतिक मोती की तरह ही है। लेकिन फर्क बस इतना है कि इसमें मानवीय हस्तक्षेप किया जाता है।

     

    मोतियों के अलग-अलग प्रकार के बारे में तो हमने जान लिया, अब आते हैं असली मुद्दे पर और जानते हैं कि मोतियों की खेती कैसे शुरू की जा सकती है। 

     

    1. सबसे पहले ट्रेनिंग लें

    मोतियों की खेती शुरू करने से पहले उसकी ट्रेनिंग बहुत ज़रूरी है। इसके लिए आप अपने नज़दीकी प्रशिक्षण केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। वहीं, इस व्यवसाय से जुड़े कुछ लोग भी इसकी ट्रेनिंग देते हैं। लिहाज़ा, आप ऐसे किसी व्यक्ति से भी संपर्क कर सकते हैं। बिना ट्रेनिंग के मोतियों की खेती करना बिल्कुल भी संभव नहीं है। 

     

    2. साइट का चयन करें

    ट्रेनिंग के बाद बारी आती है, साइट के चयन की। यहां साइट से मतलब, खेती करने की जगह से है। आपको ऐसी किसी जगह का चयन करना चाहिए जहां पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो और वह जगह स्थाई हो। वो इसलिए क्योंकि एक बार मोतियों की खेती करने के बाद उसे स्थानांतरित करना उचित नहीं होता।  

     

    3. फार्म सेट अप करें

    फार्म सेट अप करने के लिए आपको सबसे पहले तालाब बनाने की ज़रूरत होगी। इसके अलावा पानी को बाहर निकालने की भी उचित व्यवस्था करनी होगी। वहीं, फार्म के ऊपर छप्पर या शेड बनाना भी ज़रूरी होता है। 

     

    4. सीप को कलेक्ट करें

    झील, तालाबों या नदियों से सीप एकत्रित किए जा सकते हैं। या फिर किसी फार्म के मालिक या बाज़ार से इन्हें खरीदा जा सकता है। पश्चिम बंगाल सीपों की बिक्री के लिए सबसे ज़्यादा प्रसिद्ध है। 


    5. इम्प्लैन्टेशन करें

    इम्प्लैन्टेशन से पहले सीप को 2 से 3 दिन के लिए पानी के अंदर रखा जाता है, जिससे सर्जरी की प्रक्रिया में मदद मिलती है। इम्प्लैन्टेशन 3 तरह से किया जाता है। पहला मैंटल कैविटी इम्प्लैन्टेशन, दूसरा मैंटल टिश्यू इम्प्लैन्टेशन और तीसरा गॉनैडल इम्प्लैन्टेशन। आप अपने बजट के अनुरूप इन विधियों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं।

     

    6. इम्प्लैन्टेशन के बाद की प्रक्रिया पूरी करें

    सीप में इम्प्लैन्टेशन और ग्राफ्टिंग की प्रक्रिया के बाद उन्हें करीब 10 से 15 दिन के लिए नायलॉन के बैग में रखा जाता है। उन्हें प्राकृतिक आहार भी दिया जाता है। लेकिन इस दौरान हर दिन यह भी सुनिश्चित करना ज़रूरी होता है कि कहीं कोई सीप खराब तो नहीं हुआ है। यदि ऐसा होता है, तो उस सीप को तुरंत अलग करना होता है। 

     

    7. अब उसे तालाब में रखें 

    जैसा कि हमने आपको बताया कि सीप को नायलॉन के बैग में रखा जाता है। इसके बाद बांस की मदद से उन्हें तालाबों में रखा जाता है। इस दौरान तालाब की सफाई का विशेष ध्यान रखना होता है।

     

    8. सही समय पर हार्वेस्ट (Harvest) करें

    यह मोतियों की खेती का सबसे अंतिम चरण होता है। इसमें मोती को सीप से बाहर निकाला जाता है। मोतियों को निकालने के बाद उसे सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है।

     

    9. मार्केटिंग

    मोतियों को बेचना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है। आप चाहें तो इसे किसी बड़े फार्म के संचालक को भी बेच सकते हैं या फिर मुंबई, सूरत और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में जाकर इनकी बिक्री कर सकते हैं

     

    हमें उम्मीद है कि आपको हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा। यदि आप मोतियों की खेती पर और अधिक जानकारी चाहते हैं तो आपको हमारा ब्लॉग “मोतियों की खेती (Pearl Farming) क्यों है फ़ायदेमंद” ज़रूर पढ़ना चाहिए।  



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