मछली पालन के फ़ायदों (Advantages of Fish Farming) को जानें?

मछली पालन के फ़ायदों (Advantages of Fish Farming) को जानें?

मछली पालन (fish farming) कृषि क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण अंग है। किसानों को मछली पालन के ढेरों फ़ायदे (Advantages of Fish Farming) मिलते हैं। आइए, जानें।

23 October 2020

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  • भारत में कृषि क्षेत्र का दायरा बहुत बड़ा है और मछली पालन उसका एक अभिन्न अंग है। मछली पालन ने देश के किसानों को एक नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। इससे किसानों को ढेरों लाभ मिल रहे हैं। आज इस ब्लॉग के ज़रिए हम मछली पालन और उससे होने वाले फ़ायदों पर ही बात करेंगे। तो चलिए, आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि ये मछली पालन आख़िर है क्या?

     

    मछली पालन क्या है (What is fish farming)?

    किसी तालाब या किसी निश्चित घेरे में मछलियों को अपने उपयोग और कमर्शियल प्रॉफिट के लिए पालना मछली पालन (fish farming) कहलाता है। सरल शब्दों में कहें, तो आय व मुनाफ़े के लिए मछलियों को पालना ही मछली पालन है।

     

     

     

    मछली पालन के फ़ायदे (Advantage of Fish Farming):

     

    बेहतर आय व मुनाफ़ा:

    आपको बता दें कि धान और गेहूं की खेती की तुलना में मछली पालन में मुनाफ़ा अधिक है। जानकारों का मानना है कि मछली पालन के ज़रिए इन फसलों की तुलना में करीब 50 फ़ीसदी ज़्यादा लाभ हासिल किया जा सकता है। कई किसान ऐसे भी हैं जो मछली पालन से हर साल लाखों रूपए कमा रहे हैं। यदि इसकी प्रति हेक्टेयर आय पर नज़र डाली जाए, तो एक किसान औसतन दो से ढाई लाख रुपए प्रतिवर्ष तक का लाभ कमा सकता है।

     

    अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार और निर्यात:

    दुनिया के हर हिस्से में मछलियां खाई जातीं हैं। इसलिए एक बड़ा वैश्विक बाज़ार पहले से ही तैयार है। रही बात भारत की, तो आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भारत दुनिया के सबसे बड़े मछली निर्यातकों (Exporters) में से एक है। कई अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में हमारी फ्रोज़न मछलियों और झींगों की डिमांड है, जिसके चलते बड़ी तादाद में इन्हें एक्सपोर्ट किया जाता है। इसलिए मछलियों की बिक्री को लेकर किसानों को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। उनके पास लोकल मार्केट से लेकर अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार तक अपनी मछलियां बेचने का ऑप्शन है। 

     

    मछलियों की प्रजाति चुनने का विकल्प (Species selection):

    यह मछली पालन की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) है। इसमें किसानों को मछलियों की प्रजाति चुनने का विकल्प मिल जाता है। मान लीजिए, किसान को ऐसी किसी मछली का उत्पादन करना है जो महंगे दामों में बिकती है, या फिर मांग तथा मुनाफ़े के लिहाज़ से एक बेहतर विकल्प है, तो उसके अनुरूप वह उन मछलियों को पाल सकता है। किसान मछली की किसी ख़ास प्रजाति को पालने के लिए बाध्य नहीं होते हैं।

     

    रोज़गार को बढ़ावा (Creating Employment opportunities):

    मछली पालन रोज़गार के लिहाज़ से भी बेहद अहम है। यहां बताना ज़रूरी है कि भारत में करीब डेढ़ करोड़ से भी ज़्यादा लोग मछली पालन संबंधी गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। वहीं, जिस रफ़्तार से मछली पालन के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है, संभवतः आने वाले सालों में इसमें रोज़गार के और भी अवसर पैदा होंगे। खास बात यह है कि आज सिर्फ़ किसान ही नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे युवा भी मछली पालन को गंभीरता से ले रहे हैं। इससे उद्यमिता (entrepreneurship) को भी बढ़ावा मिल रहा है। 

     

    सरकार से प्रोत्साहन व मदद (Aid from Government)

    किसानों की स्थिति सुधारने के लिए सरकार लगातार मछली पालन के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए समय-समय पर योजनाएं भी चलाई जा रहीं हैं। ऐसी कई योजनाएं हैं, जिनके तहत किसानों को मछली पालन के लिए सब्सिडी मिलती है। साथ ही लोन के भी प्रावधान किए गए हैं। अगर ये भी कम है, तो आपको बता दें कि सरकार मछली पालन पर प्रशिक्षण भी प्रदान करती है। है ना फायदे की बात

     

    उम्मीद है कि आपको हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा। यदि आप मछली पालन के बारे में और अधिक जानकारी चाहते हैं, तो आपको हमारा ब्लॉग मछली पालन के आसान तरीकों(fish farming methods)को समझेंज़रूर पढ़ना चाहिए।   

     



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