मिट्टी की जांच (soil testing) क्यों ज़रूरी है?

मिट्टी की जांच (soil testing) से मिलती है पोषक तत्वों की जानकारी

खेतों में अच्छी उपज होगी तभी किसान और देशवासियों की आवश्यकताओं की पूर्ति होगी। इस लक्ष्य को हासिल करने में मिट्टी की जांच (soil testing) का अहम योगदान है।

06 October 2020

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  • जो जाने इस मिट्टी का मोल, वो पहचाने ये कितनी अनमोल...किसी ने सच ही कहा है कि मिट्टी का मोल हर कोई नहीं समझ सकता। इसकी असली कीमत वो ही जानता है, जो इसके सबसे करीब हो, और भला हमारे किसान भाइयों से ज़्यादा मिट्टी के करीब और कौन हो सकता है? किसानों के लिए मिट्टी क्या है ये किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन इस मिट्टी में क्या है, यह जानने की आवश्यकता ज़रूर है। हमें भी और हमारे किसानों को भी, क्योंकि ये मिट्टी ही हम सबका जीवन तय करती है। तो चलिए, इस ब्लॉग के ज़रिए ये जानने की कोशिश करते हैं कि मिट्टी में ऐसे कौन से गुणकारी तत्व (elements) मौजूद हैं, जो फसलों के लिए ज़रूरी हैं और मिट्टी की जांच (soil testing) इन तत्वों को जानने में कैसे मदद करती है।

    इससे पहले कि हम विस्तार से इस मुद्दे पर चर्चा करें, हमारा ये जानना ज़रूरी है कि आख़िर मिट्टी की जांच (soil testing) होती क्या है?

     

    मिट्टी की जांच (soil testing):

    खेतों की मिट्टी में कई तरह के रसायन व पोषक तत्व पाए जाते हैं। इनकी पहचान करने के लिए जो जांच की जाती है, उसे ही मिट्टी की जांच (soil testing) कहते हैं।

     

    मिट्टी की जांच (soil testing) क्यों ज़रूरी है?

    ये बात हम सभी जान चुके हैं कि मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की वजह से ही फसलों व पौधों का विकास होता है। लेकिन अक्सर हमारे किसान भाई एक ही तरह की फसल लेने की गलती कर बैठते हैं। इससे मिट्टी के गुणकारी तत्वों में कमी आने लगती है। साथ ही मिट्टी में असंतुलन भी पैदा हो जाता है। इसलिए मिट्टी की जांच ज़रूरी हो जाती है। मिट्टी की जांच के बाद किसानों के लिए अगली फसल का चयन करना आसान हो जाता है। 

     

    मिट्टी की जांच से किसानों को क्या जानकारी मिलती है?

    • किसानों को अपने खेतों की मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन (nitrogen), पोटैशियम (potassium), फॉस्फोरस (phosphorus), मैग्नीशियम (magnesium) आदि तत्वों की जानकारी मिलती है, जो फसलों के निर्धारण में व उनके विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।
    • उन्हें मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों (micro-organisms) की जानकारी भी प्राप्त हो जाती है।
    • इसके अतिरिक्त वे भूमि की बनावट को भी समझ पाते हैं।
    • जांच से उन्हें आवश्यक तत्वों की कमी या अधिकता भी मालूम चल जाती है।
    • साथ ही, वे यह भी जान पाते हैं कि मिट्टी में पीएच (ph value) व अम्लीयता की स्थिति क्या है।
    • उन्हें यह जानकारी भी मिल जाती है कि फसलों के लिए किस खाद का प्रयोग करना है और कितनी मात्रा में करना है।
    • वहीं, यदि जांच के बाद भूमि में सुधार की आवश्यकता होती है, तो ऐसी स्थिति में भूमि को सुधारने वाले रसायनों जैसे कि जिप्सम (gypsum) आदि के उपयोग में भी आसानी हो जाती है।

    जब किसानों को इन सभी बातों की जानकारी होती है, तो उनके लिए खेती करना और भी आसान हो जाता है और वे उपज संबंधी परेशानियों से भी दूर रहते हैं। इसलिए किसानों को समय-समय पर अपने खेतों की मिट्टी की जांच (soil testing) ज़रूर करानी चाहिए। 

     

     

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