आइए जानें, बीजों का महत्व एवं प्रकार

अच्छी फसल के लिए बीजों की पहचान जरूरी

किसानों को अच्छे व खराब बीज की पहचान होना जरुरी है। फसल का अधिकतम लाभ अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का प्रयोग करके ही लिया जा सकता है।

14 August 2020

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  • जब होगी अच्छा बीज, तभी मिलेगा अच्छा उत्पादन... ये पंक्तियाँ आपको अक्सर बड़े-बुजुर्ग और अनुभवी किसानों से सुनने को मिल जाएगी। क्योंकि कृषि में जमीन, श्रम, सिंचाई और लागत के बाद सबसे जरूरी चीज है, तो वह है बीज का।

     

    गुणवत्तापूर्ण बीजों का होना, खेती के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि हमारे देश में अच्छी जलवायु होते हुए भी फसलों का औसत उत्पादन बहुत कम है। इसका प्रमुख कारण देश के किसानों द्वारा कम गुणवत्ता वाले बीजों का लगातार प्रयोग है। जबकि इजराइल जैसे देशों में अच्छे और गुणवत्तापूर्ण बीजों से ही ज्यादा उत्पादन ले पाते हैं। 

     

    हमारे देश के किसानों की भी यही इच्छा रहती है कि हमारी फसल अच्छी हो और उससे अच्छा मुनाफा हो, ताकि हम अपनी पूरी लागत निकालकर अपना घर चला सके।

     

    लेकिन किसान भाइयों, अच्छी फसल तभी प्राप्त होगी, जब हम अपने खेतों में अच्छे बीज डालेंगे। इसके लिए हमें अच्छे व खराब बीज की पहचान होना जरुरी है, ताकि हम उत्तम बीजों का खेती में प्रयोग कर कम लागात में ही अच्छा मुनाफा कमा सकें।

     

    तो आइए इस ब्लॉग में जानें कि अच्छा बीज क्या होता और इसका चुनाव कैसे करें।

     

    बीज (परिभाषा)

     

    पौधे का वह भाग जिसमें भ्रूण परिपक्व होता है, बीज कहलाता है। अच्छे बीज वही होते हैं जिसमें रोगों से लड़ने और अंकुरण क्षमता भी अधिक हो। 

     

    फसल उत्पादन में बीजों का महत्व

     

    जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कृषि में गुणवत्तापूर्ण बीजों के होने का विशिष्ट महत्व है, क्योंकि हमारे देश में सर्वोत्तम जलवायु होते हुए भी लगभग सभी फसलों का औसत उत्पादन बहुत कम है। यह तभी संभव है जब अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का प्रयोग किया जाए।
     
    उच्च गुणवत्ता के प्रमाणित बीज के प्रयोग से ही लगभग 20 प्रतिशत उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है। आपको बता दें कि 1960 के दशक में भारत में उन्नतशील बीजों के प्रयोग से ही हरित क्रांति आई थी।

     

    अच्छे बीजों के शुद्धता के मानक

     

    • बीज की भौतिक शुद्धता
    • बीज की आनुवंशिक शुद्धता
    • बीजों के गुण, आकार, आकृति एवं रंग
    • बीजों में नमी की मात्रा
    • बीज की परिपक्वता
    • बीजों की अंकुरण क्षमता
    • बीजों की जीवन क्षमता

     

    अच्छे बीज की विशेषताएं

     

    1. बीज कम से कम लागत से प्रति इकाई क्षेत्रफल से अधिक उपज देने वाला बीज हो। 
    2. उन्नत बीज में अच्छी किस्म, पोषण व स्वाद में उत्तम होने के साथ-साथ उपभोक्ता, बाजार और उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप हो, जैसे- गन्ने में चीनी की मात्रा, कपास में रेशे की गुणवत्ता और तिलहनों में तेल की गुणवत्ता अच्छी हो। 
    3. अच्छे उन्नत बीज में क्षेत्र की जलवायु के अनुसार समय पर पकने वाले हो और उसमें एक समानता हो। 
    4. अच्छे उन्नत बीज की किस्म में विपरीत परिस्थितियों जैसे- बीमारियों, कीड़ों, सूखा, बाढ़, पाला, गर्मी, सर्दी और मिट्टी की ऊसरता आदि के प्रति सहनशील हो। 
    5. अच्छे उन्नत बीज में, कृषि कार्यों जैसे- सिंचाई, उर्वरकों के प्रयोग, निराई-गुड़ाई और मशीन से कटाई आदि में आसानी हो। 

     

    अगर किसान बीज को लेते समय इन सभी बातों का ध्यान रखें, तो वे अपने खेतों के लिए उत्तम बीज का चयन कर सकते हैं। जिससे उन्हें एक अच्छी फसल प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

     

    उपरोक्त से भी स्पष्ट है कि अधिक पैदावार के लिए सही फसल और उनके बीजों का चुनाव करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है। 

     

    अच्छे बीज कैसे पहचाने?

     

    जैसा कि इससे पहले भी जिक्र किया जा चुका है कि उस बीज को उत्तम कोटि का माना जाता है जो आनुवांशिक शुद्धता, रोग व कीट के प्रभाव से मुक्त हो और उसकी अंकुरण क्षमता उच्च कोटि की हो।
     
    बीज के अन्दर नमी की मात्रा सही होनी चाहिए ताकि बीज अच्छे से अंकुरित हो सके, अगर बीज में नमी की मात्रा सही नहीं होगी तो बीज के अन्दर उपस्थित भ्रूण की मृत्यु हो जाएगी तथा बीज अंकुरित नहीं हो पाएगा। बीजों की परिपक्वता भी सही होनी चाहिए ताकि उपज अच्छी हो सके।

     

    इसके अलावा जब भी किसान बीज खरीदें, तो इस बात का ध्यान रखें कि बीज हमेशा भरोसेमंद दुकान, सरकार द्वारा अधिकृत बीज भंडार से ही खरीदें।

     

    बीजों के प्रकार

     

    केन्द्रीय प्रजाति विमोचन समिति (Crop Standards, Notification and Release of Varieties of Agricultural Crops) के अनुसार बीजों की निम्नलिखित चार श्रेणियाँ होती है। 
     

    1. प्रजनक बीज

    प्रजनक बीज वह वर्ग है जो आनुवांशिक रूप से शुद्ध रहता है जिसे प्रजनक (ब्रीडर) की देखरेख में तैयार किया जाता है, जिसमें बीज की आनुवंशिक एवं उच्च गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाता है। इन बीजों की थैलियों पर पीले रंग का टैग (लेबिल) लगाने का प्रावधान है जिससे प्रजनक बीज की पहचान हो सके।

     

    2. आधारीय बीज

    इस बीज का उत्पादन प्रजनक बीज से किया जाता है आवश्यकतानुसार आधारीय प्रथम से आधारीय द्वितीय बीज का उत्पादन किया है। इसकी उत्पादन, संसाधन, पैकिंग, रसायन उपचार एवं लेबलिंग आदि प्रक्रिया बीज प्रमाणीकरण संस्था की देख-रेख में मानकों के अनुरूप होती है। इसके थैलों में लगने वाले टैग का रंग सफेद होता है।

     

    3. प्रमाणित बीज

    कृषकों को फसल उत्पादन हेतु बेचे जाने वाला बीज प्रमाणित बीज है जिसका उत्पादन आधारीय बीज से बीज प्रमाणीकरण संस्था की देख रेख में मानकों के अनुरूप किया जाता है। प्रमाणित बीज के टैग का रंग नीला होता है।

     

    4. सत्यापित बीज 

    इसका उत्पादन, उत्पादन संस्था द्वारा आधारीय/प्रमाणित बीज से मानकों के अनुरूप किया जाता है। इसमें उत्पादन संस्था का लेवल लगा होता है 

     

    अतः किसानों को बीज का चुनाव करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक हो जाता है।


    बुआई के लिए, बीज चयन में निम्नलिखित सावधानी बरतनी चाहिए।

     

    1. हमें पूरे बीजों का चयन करना चाहिए और टूटे हुए, या कुचले हुए बीजों से बचना चाहिए।

    2. बीजों की बुवाई की गुणवत्ता उच्च होनी चाहिए।

    3. उनमें उच्च अंकुरण क्षमता होनी चाहिए।

    4. बीज संक्रमण से मुक्त होना चाहिए।

    5. बीजों को खरपतवारों के बीजों या अन्य बीजों के साथ नहीं मिलाना चाहिए।

    6. बीज को रोग प्रतिरोधी होना चाहिए।

     

    बीजों का उत्पादन स्वयं किसान कैसे करें?


    किसान अपने स्वयं के बीज भी पैदा कर सकते हैं। इसके लिए किसान खड़ी फसल में से गुणवत्ता पूर्ण पौधों को कटाई के समय अलग कर सकते हैं। बीज उत्पादन के लिए लगाए गए फसल में विभिन्न पौधों के लक्षणों का निरीक्षण करके किसान यह जान सकते है कि कौन-सा पौधा बेहतर विकास कर रहा है और कौन-सा नहीं।
     
    बेहतर पौधे को एक रिबन के साथ पसंदीदा पौधों की श्रेणी में चिह्नित कर सकते हैं। कटाई के दौरान, किसान इन चिह्नित पौधों के बीज को अगली फसल के लिए सुरक्षित कर सकते हैं। इसके अलावा किसानों को चाहिए कि वे अपनी फसलों के बीज प्रत्येक 3 वर्ष में बदल कर बुआई करें।

     

    संक्षेप में कहें तो प्रमाणित और उत्कृष्ट बीज के उपयोग से ही किसान अपनी फसल की उत्पादकता को बढ़ा सकते हैं साथ ही लागत भी कम कर सकते हैं।

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