जानें, मछली पालन (fish farming) में कितना है फ़ायदा?

जानें मछली पालन(fish farming ) के लागत और मुनाफ़े का गणित

मछली पालन में लागत और मुनाफ़ा (Fish farming cost and profit) बहुत मायने रखते हैं। इस ब्लॉग में हम मछली पालन (Fish farming) के इसी पहलू पर बात करेंगे।

27 October 2020

  • 606 Views
  • 5 Min Read

  • इंसान किसी भी काम को शुरू करने से पहले ‘मुनाफ़े’ और नुकसान’ के बारे मेंं ज़रूर सोचता है। ये बात खेती-किसानी पर भी लागू होती है और अगर बात मछली पालन (fish farming ) जैसे व्यवसाय की हो, तो इसके बारे में जानना और भी ज़रूरी हो जाता है। तो चलिए, इस ब्लॉग के ज़रिए मछली पालन के मुनाफ़े और नुकसान के गणित को समझने का प्रयास करते हैं।  

    लेकिन इससे पहले ये जान लेते हैं कि मछली पालन (fish farming) के लिए आपको किन-किन चीज़ों की आवश्यकता पड़ेगी।

     

    पानी (Water)

    सबसे पहले आपको पानी और उसका स्रोत सुनिश्चित करना होगा। यदि तालाब की गहराई 4 से 6 फीट के बीच होगी, तो मछली पालन करना बहुत आसान होगा। इसलिए बेहतर होगा कि किसान भाई खुदाई के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखें। 

    वहीं, मौजूदा तालाबों में भी मछली पालन किया जा सकता है। लेकिन उत्पादकता के लिहाज़ से उसमें कुछ परेशानियां आ सकतीं हैं क्योंकि आप अपनी सुविधानुसार ना तो उन्हें सुखा सकते हैं और ना ही उसमें जाल बिछा सकते हैं। यदि तालाब आपकी अपनी भूमि पर है, तो बात अलग है क्योंकि अपनी भूमि पर खुदे तालाब में आप मछली पालन की सारी गतिविधियों को नियंत्रित कर सकते हैं। 

     

    आहार (Feed)

    मछली पालन में आहार सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। जितना अच्छा आहार होगा, मछलियों की पैदावार उतनी अच्छी होगी। जब आप मछलियों की प्रजाति तय करते हैं, आपको उनका आहार भी तय करना ज़रूरी होता है क्योंकि मछलियों की अलग-अलग प्रजातियां अलग-अलग आहार पर निर्भर रहतीं हैं।  

     

    प्रशिक्षण (Training)

    मछली पालन शुरू करने से पहले इसकी ट्रेनिंग बहुत ज़रूरी है, वर्ना आपकी सारी मेहनत ज़ाया हो सकती है। आपको बता दें कि सरकार मछली पालन पर ट्रेनिंग प्रदान करती है। आप चाहें, तो अपने नज़दीकी मछली पालन विभाग से इस संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

    अब आते हैं आर्थिक मोर्चे पर, जिसके बारे में जानना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

     

    मछली पालन की लागत (Fish Farming cost)

    मछली पालन (fish farming ) के लिए आपको सबसे पहले ज़रूरत होगी ज़मीन की। यदि आपके पास ज़मीन है, तो आपकी लागत काफ़ी कम होगी। यदि नहीं है, तो आपको ज़मीन के लिए पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।

    मान लीजिए, यदि आप एक एकड़ भूमि पर मछली पालन करना चाहते हैं, तो आपको प्रतिवर्ष करीब 50 हज़ार से लेकर 1 लाख तक की रकम खर्च करनी पड़ सकती है। आपको बता दें कि लागत के निर्धारण में कई अन्य चीज़ें भी मायने रखतीं हैं। जैसे कि भूमि की बनावट कैसी है, कितनी खुदाई करनी है, ड्रैनेज चैनल की गहराई क्या होगी, मछलियों की स्टॉकिंग किस दर से की जाएगी और कौन सी मछलियां पाली जाएंगी इत्यादि।  

    यदि हम प्रति एकड़ न्यूनतम लागत पर भी गौर करें, तो भूमि पर खर्च के अतिरिक्त आपको खुदाई व स्टॉकिंग आदि के लिए करीब 50 हज़ार रुपए खर्च करने पड़ सकते हैं। साथ ही तालाब और मछलियों के बेहतर रखरखाव आदि पर भी आपको थोड़ा-बहुत खर्च करना पड़ सकता है, जो सालाना आधार पर तकरीबन 25 से 30 हज़ार की रकम हो सकती है।

     

    प्रति एकड़ मुनाफ़ा (fish farming profit per acre)

    मुनाफ़े के गणित को हम कतला मछली के उदाहरण के साथ समझते हैं। जानकारों की मानें, तो यदि कोई किसान बेहतर तरीके से कतला मछली की पैदावार करता है और प्रतिवर्ष 1.5 से 2 लाख रुपए तक की कतला मछली बेच पाता है, तो वह 1 लाख या उससे अधिक का लाभ कमा सकता है। यहां यह बताना भी आवश्यक है कि मछलियों की प्रजाति भी लाभ के अनुपात को प्रभावित करती है। यदि आप किसी अन्य प्रजाति को चुनते हैं, तो आपको मिलने वाला लाभ कम या अधिक हो सकता है। 

     

    भारत में मछली पालन की प्रचलित प्रजातियां

    सैल्मन, तिलपिया, कतला, रोहू, कैटफ़िश, ग्रास कार्प, कॉमन कार्प, सिल्वर कॉर्प, मृगल जैसी मछलियां मछली पालन के व्यवसाय में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय हैं। मछली की कई प्रजातियां ऐसी भी हैं जिन्हें पालना थोड़ा महंगा पड़ता है, मगर लाभ की दृष्टि से भी वो बेहतर होती हैं।

     

    राज्य जो मछली पालन में हैं अग्रणी

    भारत में कई राज्य ऐसे हैं जो मछली पालन में अग्रणी हैं। ख़ासकर, तटीय राज्य जैसे कि पश्चिम बंगाल, केरल, गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक इस सूची में सबसे ऊपर आते हैं।

     

    किसानों को सलाह

    किसानों को हमारी यही सलाह होगी कि वे मछली पालन शुरू करने से पूर्व इसकी ठोस जानकारी अवश्य लें। उन्हें संबंधित विभाग से मदद व प्रशिक्षण दोनों मिल सकते हैं। इस तरह वे बेहतर तरीके से इस व्यवसाय में अपनी जगह बना सकेंगे।

     

    उम्मीद है कि आपको हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा। यदि आप मछली पालन पर और अधिक जानकारी चाहते हैं, तो आपको जानें, क्या है बायोफ्लॉक तकनीक (Biofloc Technology)?” को अवश्य पढ़ना चाहिए।

     

     

     



    यह भी पढ़ें



    कृषि की अन्य ब्लॉग