जानें, जैविक कृषि (organic farming) के फायदों के बारे में

जानें, जैविक कृषि (organic farming) के फायदे

देश में एक बार फिर से जैविक कृषि (Organic Farming) को अपनाया जा रहा है। जैविक कृषि से किसानों और पर्यावरण को कई लाभ मिलते हैं, जिनका ज़िक्र हम ब्लॉग में करेंगे।

20 October 2020

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  • बीते कुछ दशकों में कृषि क्षेत्र में रासायनिक दवाओं और खादों का इस्तेमाल इतनी तेज़ी किया गया कि जैविक कृषि कहीं खो गई। लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा। लेकिन अब एक बार फिर से पूरे देश में जैविक कृषि पर ज़ोर दिया जा रहा है। यहां, आपको यह बताना भी ज़रूरी है कि जैविक कृषि (Organic Farming) मनुष्य के स्वास्थ्य के अलावा मिट्टी की उपजाऊ क्षमता के लिए भी बहुत ज़रूरी है। तो चलिए, इस ब्लॉग के ज़रिए जैविक कृषि के लाभ (advantages of organic farming) पर प्रकाश डालने का प्रयास करते हैं। 


     

    जैविक कृषि के लाभ (Benefits of Organic Farming):

     

    किसानों को मिलने वाले लाभ

     

    जैविक कृषि में किसान प्राकृतिक चीज़ों का ही इस्तेमाल करते हैं। इसके चलते केमिकल फर्टिलाइज़र और पेस्टिसाइड्स पर उनकी निर्भरता कम होती है। साथ ही मिट्टी की उपजाऊ क्षमता भी बढ़ती है। वहीं, किसान कम लागत में बेहतर पैदावार हासिल करने में भी सक्षम हो पाते हैं। फलस्वरूप किसानों की आय भी बढ़ती है।  

     

    भूमि को होने वाले लाभ

    रासायनिक कृषि (chemical farming) ने मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को प्रभावित किया है और मानव जीवन को खतरे में डाला है। ऐसी स्थिति में जैविक कृषि एक वरदान की तरह है। इससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही उसकी जल धारण करने की क्षमता भी बेहतर होती है। वहीं, यह भी देखा गया है कि इससे सिंचाई संबंधी समस्याएं भी दूर होतीं हैं।

     

    पर्यावरण को होने वाले लाभ

    जैविक खाद बनाने के लिए गोबर, कम्पोस्ट, जैविक कीटनाशकों और फसल अवशेषों (कचरे) का इस्तेमाल किया जाता है। इसके कई लाभ मिलते हैं। पहला, इससे कचरे का निपटारा हो जाता है। दूसरा, खेतों की मिट्टी में नमी बनी रहती है। तीसरा, मिट्टी प्रदूषित होने से भी बच जाती है। 

    “पर्यावरण, मिट्टी की उपजाऊ क्षमता और किसानों को होने वाले लाभ के अलावा ‘जैविक कृषि’ के अन्य फ़ायदे भी हैं।” जैसे-

     

    पोषण से भरपूर आहार

    जैविक रूप से तैयार की गई फसलों में भरपूर पोषक तत्व होते हैं। फलों और सब्ज़ियों में अधिक ऐन्टी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं क्योंकि उनमें पेस्टिसाइड्स नहीं होते। बता दें कि ऐन्टी-ऑक्सीडेंट्स विटामिन, खनिजों और रसायनों का एक मिला-जुला रूप है, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत अहम हैं। यह हमारे शरीर में मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट कर हमारे शरीर को रोग मुक्त करने में मदद करते हैं। मौजूदा हालातों पर गौर करें, तो जैविक आहार मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है।

     

    ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों से लड़ने में मदद

    केमिकल आधारित कृषि ने ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा दिया है। कई अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं। वहीं, कई अध्ययन ऐसे भी हैं जो बताते हैं कि जैविक कृषि कैसे ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से लड़ने में मदद कर रही है। 

     

    अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किए गए एक अध्ययन के मुताबिक जैविक कृषि की मदद से कार्बन डाइऑक्साइड को कम किया जा सकता है। साथ ही यह जलवायु परिवर्तन की गति कम करने में भी मददगार साबित हो सकती है।

     

    जैविक कृषि पूरी तरह से प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। इसलिए इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। यदि हम सभी जैविक कृषि और जैविक आहार को बढ़ावा दें, तो संभवतः हम कृषि और स्वास्थ्य संबंधी कई मुश्किलों को दूर कर सकते हैं। इसलिए जैविक कृषि का दामन थामना हम सबके लिए बेहद ज़रूरी है।

     

    उम्मीद है कि आपको हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा। यदि आप जैविक कृषि के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं, तो आप हमारे ब्लॉग जानें, जैविक खेती (organic farming) क्यों है ज़रूरी?को ज़रूर पढ़ें। इससे आपको जैविक कृषि के कई अन्य पहलुओं को जानने में मदद मिलेगी। 

     

    ✍️

    लेखक- भावना चौहान

      

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